भगवान बुद्ध के विचारों की वर्तमान समय से प्रासंगिकता विचारक-किशन गोपाल मीना टी जी टी संस्कृत केंद्रीय विद्यालय सवाई माधोपुर (राजस्थान)संसार की रचना अदभूत है प्राकृतिक सौंदर्यता विशाल समुद्र ,नीले गगन की असीम सुंदरता ,कल –कल बहते झरने ,ऊंचे-ऊंचे पर्वत ,विविध जीव मानों सृष्टि में तीनों लोकों की मानों सकल चारुता रस घोल दिया हो |विशेष कर मानव कृति के लिए तो सारे गुण ,सुंदरता ,दयालुता ,कारुण्यभाव आदि प्रदान कर मानों देवताओं के साथ भेदभाव किया हो |मानव जीवन इस जगत का सर्वोपरि जीव है देवता भी इस देह के लिए आशा रखते है |
तुलसीदासजी ने रामचरित मानस मे लिखा है ------ बड़े भाग मानुष तन पावा |
सुर दुर्लभ सब ग्रंथ न गावा ||
ईश्वर ने सभी जीवों को बराबर का हक दिया है किसी के साथ भेदभाव नहीं किया है |इहलोक में सब प्रेम से रहते है |परंतु कुछ मानव ईश्वर की दी हुई शक्ति का दुरुपयोग कर रहे है ,विशेष कर निजी स्वार्थ वश इस जगत में अनर्थ कार्य कर रहे है | जिससे पृथ्वी के अनेक हिस्से विभाजित हो गए वो अलग-अलग देश के नाम से जाने गए है |आज के समय में जाति भेदभाव ,धर्म ,वर्ण आदि को माध्यम बनाकर सम्पूर्ण विश्व में कोहराम मचा हुआ सभी जगत के जीवों में आपसी गहरी खाई बनाने का काम किया जा रहा है जिसको धर्म की रक्षा मानते है |
ऐसे व्यक्तियों को भगवान बुद्ध के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए उन्होने समस्त धरातल को एक पिता –माता की संतान की संज्ञा दी थी |शास्त्रों ठीक कहा है ----“उदारचरितानां वसुधैव कुटुम्बकम “पृथ्वी हि हमारा परिवार है |
आज भी बुद्ध के विचार संसार में कीर्तिस्तंभ की तरह जगत के जीवों को आपसी भाई-चारे का संदेश ,अहिंसा,कल्याण ,लोक हित आदि से देदीप्यमान है |भारत में जन्मी इस बोद्दिक विचारधारा से अनेक देश प्रभावित हुए ,जैसे –श्रीलंका ,जापान ,चीन,सिंगापूर आदि अनेक देश बुद्दमय हो गए |विचारों में निर्वाण से भी महानिर्वाण की प्राप्ति जब तक लोभ,स्वार्थ,मोह,निजभाव आदि जीवन के शत्रु है इनसे मुक्ति पाना महानिर्वाण कहा गया है |
आज के युग में इनके विचारों से ही जगत में आपसी प्रेम भाईचारा वापिस पुनर्जीवित किया जा सकता है ,क्योंकि भगवान बुद्द के विचार ही जीवन के परम कल्याण की कुंचिका है |आतंकवाद ,नक्सल्वाद ,धार्मिक शत्रुता ,सरहदे ,
आदि पीड़ाए भोली निर्दोष प्रजा को आपसी वैमनस्यता में जलाकर राख़ कर रही है |वर्तमान में भगवान बुद्द के जीवन के मुख्य पहलू प्रासंगिक है राजमहल त्याग देना ,निर्वाण प्राप्ति की और आगे अग्रसर होना ,पीड़ितो की सेवा करना |वर्तमान में सभी देश सुख-दुख में एक दूसरे की सहायता करनी चाहिए ,प्राकृतिक आपदा में सहयोग की भावना ,बड़े देश छोटे देशों पर स्वामित्व न जमाए आदि भावनाए हमे पाशविक प्रवृति से बचा सकती है |इस संसार को एकसूत्र में केवल भगवान बुद्द के विचार ही पिरो सकते है | हमें आज सभी को एक संकल्प लेना चाहिए की सम्पूर्ण पृथ्वी ही हमारा समाज अथवा परिवार है |
स्वयं के विचारों पर आधारित कवितामानवता का अपमान न कर जीवन भर रोएगा |
दो दिन का सुख आजीवन शोक भर जाएगा ||
धर्म वर्ण जाति की जंजीरे रोक न पाएगी बर्बादी |
समरसता संभाव त्याग जगत के है रक्षाकारी || भगवान बुद्ध के विचारों की वर्तमान समय से प्रासंगिकता विचारक-किशन गोपाल मीना टी जी टी संस्कृत केंद्रीय विद्यालय सवाई माधोपुर (राजस्थान)
तुलसीदासजी ने रामचरित मानस मे लिखा है ------ बड़े भाग मानुष तन पावा |
सुर दुर्लभ सब ग्रंथ न गावा ||
ईश्वर ने सभी जीवों को बराबर का हक दिया है किसी के साथ भेदभाव नहीं किया है |इहलोक में सब प्रेम से रहते है |परंतु कुछ मानव ईश्वर की दी हुई शक्ति का दुरुपयोग कर रहे है ,विशेष कर निजी स्वार्थ वश इस जगत में अनर्थ कार्य कर रहे है | जिससे पृथ्वी के अनेक हिस्से विभाजित हो गए वो अलग-अलग देश के नाम से जाने गए है |आज के समय में जाति भेदभाव ,धर्म ,वर्ण आदि को माध्यम बनाकर सम्पूर्ण विश्व में कोहराम मचा हुआ सभी जगत के जीवों में आपसी गहरी खाई बनाने का काम किया जा रहा है जिसको धर्म की रक्षा मानते है |
ऐसे व्यक्तियों को भगवान बुद्ध के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए उन्होने समस्त धरातल को एक पिता –माता की संतान की संज्ञा दी थी |शास्त्रों ठीक कहा है ----“उदारचरितानां वसुधैव कुटुम्बकम “पृथ्वी हि हमारा परिवार है |
आज भी बुद्ध के विचार संसार में कीर्तिस्तंभ की तरह जगत के जीवों को आपसी भाई-चारे का संदेश ,अहिंसा,कल्याण ,लोक हित आदि से देदीप्यमान है |भारत में जन्मी इस बोद्दिक विचारधारा से अनेक देश प्रभावित हुए ,जैसे –श्रीलंका ,जापान ,चीन,सिंगापूर आदि अनेक देश बुद्दमय हो गए |विचारों में निर्वाण से भी महानिर्वाण की प्राप्ति जब तक लोभ,स्वार्थ,मोह,निजभाव आदि जीवन के शत्रु है इनसे मुक्ति पाना महानिर्वाण कहा गया है |
आज के युग में इनके विचारों से ही जगत में आपसी प्रेम भाईचारा वापिस पुनर्जीवित किया जा सकता है ,क्योंकि भगवान बुद्द के विचार ही जीवन के परम कल्याण की कुंचिका है |आतंकवाद ,नक्सल्वाद ,धार्मिक शत्रुता ,सरहदे ,
आदि पीड़ाए भोली निर्दोष प्रजा को आपसी वैमनस्यता में जलाकर राख़ कर रही है |वर्तमान में भगवान बुद्द के जीवन के मुख्य पहलू प्रासंगिक है राजमहल त्याग देना ,निर्वाण प्राप्ति की और आगे अग्रसर होना ,पीड़ितो की सेवा करना |वर्तमान में सभी देश सुख-दुख में एक दूसरे की सहायता करनी चाहिए ,प्राकृतिक आपदा में सहयोग की भावना ,बड़े देश छोटे देशों पर स्वामित्व न जमाए आदि भावनाए हमे पाशविक प्रवृति से बचा सकती है |इस संसार को एकसूत्र में केवल भगवान बुद्द के विचार ही पिरो सकते है | हमें आज सभी को एक संकल्प लेना चाहिए की सम्पूर्ण पृथ्वी ही हमारा समाज अथवा परिवार है |
स्वयं के विचारों पर आधारित कवितामानवता का अपमान न कर जीवन भर रोएगा |
दो दिन का सुख आजीवन शोक भर जाएगा ||
धर्म वर्ण जाति की जंजीरे रोक न पाएगी बर्बादी |
समरसता संभाव त्याग जगत के है रक्षाकारी || भगवान बुद्ध के विचारों की वर्तमान समय से प्रासंगिकता विचारक-किशन गोपाल मीना टी जी टी संस्कृत केंद्रीय विद्यालय सवाई माधोपुर (राजस्थान)
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