विश्व बाल श्रम निषेध दिवस
पर मेरे विचार
गरीबी को बाल श्रम का मुख्य कारण माना जा सकता है, नन्हें बच्चों को खेलने ,पढ़ने एवं
मुस्कराती जिंदगी की जगह हमारा समाज बाल श्रम में धकेल देता है , छोटे –छोटे बच्चे चाय की दुकानों पर झुंठे गिलास साफ करते देखे जाते है , कुछ लोग तो ऐसे होते है जो बच्चों से नशीले पदार्थ सप्लाई करवाते है
क्योंकि इन पर प्रशासन की नजर नहीं जाती, मासूमियत के साथ
घोर जुल्म है ,इस कारण देश का भविष्य भी कलंकित होता है |
हम सभी आज संकल्प ले की छोटे बच्चों को पढ़ाई लिखाई के लिए प्रेरित करेंगे और
उनकी मदद भी करेंगे तब ही मेरा देश का भविष्य खुशहाल होगा |जो भी
बच्चों से बालश्रम करवाते है उसकी शिकायत
प्रशासन से करनी चाहिए |
हम बच्चे पंछी बनकर उड़ान भरना चाहते है
खुदा ने जिंदगी दी है हँसकर जीना चाहते है
हाथ में लेखनी किताब दे दो हम पढ़ेंगे
अपने देश का सुंदर भविष्य बनाएँगे
चाय थडी ढाबे से जीवन मुक्त कर दो
थोड़ा सहारा बनो तन में खुशियाँ भर दो
बालश्रम ने काया को जालपाश में बांधा
अनैतिक काम कराते ये दुष्टों का धंधा
हम बच्चे पंछी बनकर उड़ान भरना चाहते है
खुदा ने जिंदगी दी है हँसकर जीना चाहते है
धन्यवाद |
किशन गोपाल मीणा शिक्षक केन्द्रीय
विद्यालय बूंदी
