Tuesday, 25 August 2015

संस्कृत भाषा के विषयों को पढकर रोजगार की तलाश में भटक रहे युवा को हरेक अवसर पर रोजगार का मुद्दा उठाते रहते हैं।

संस्कृत भाषा के विषयों को पढकर रोजगार की तलाश में भटक रहे युवा को हरेक अवसर पर रोजगार का मुद्दा उठाते रहते हैं। यह स्वाभाविक है। हमें भी अत्यन्त पीडा होती है। ऐसे युवा सोचते हैं, मैं संस्कृत पढा अतः रोजगार नहीं मिला यदि और विषय पढता तो रोजगार पा लेता। कृपया हताशा में ऐसा भ्रम न पालें। आज रोजगार एक व्यापक समस्या है। आज कोई भी शिक्षा शतप्रतिशत रोजगार की गारंटी नहीं है। हरेक रोजगार प्रदाता एक गुणवत्ता युक्त सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति को चुनना चाहता है। हमें अपने विवेक से भी स्व रोजगार को ढूँढना होगा।

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