संस्कृत मम जीवनम्(संस्कृति संस्कृत पर हि आश्रित )
Thursday, 14 November 2024
Saturday, 12 June 2021
विश्व बाल श्रम निषेध दिवस
पर मेरे विचार
गरीबी को बाल श्रम का मुख्य कारण माना जा सकता है, नन्हें बच्चों को खेलने ,पढ़ने एवं
मुस्कराती जिंदगी की जगह हमारा समाज बाल श्रम में धकेल देता है , छोटे –छोटे बच्चे चाय की दुकानों पर झुंठे गिलास साफ करते देखे जाते है , कुछ लोग तो ऐसे होते है जो बच्चों से नशीले पदार्थ सप्लाई करवाते है
क्योंकि इन पर प्रशासन की नजर नहीं जाती, मासूमियत के साथ
घोर जुल्म है ,इस कारण देश का भविष्य भी कलंकित होता है |
हम सभी आज संकल्प ले की छोटे बच्चों को पढ़ाई लिखाई के लिए प्रेरित करेंगे और
उनकी मदद भी करेंगे तब ही मेरा देश का भविष्य खुशहाल होगा |जो भी
बच्चों से बालश्रम करवाते है उसकी शिकायत
प्रशासन से करनी चाहिए |
हम बच्चे पंछी बनकर उड़ान भरना चाहते है
खुदा ने जिंदगी दी है हँसकर जीना चाहते है
हाथ में लेखनी किताब दे दो हम पढ़ेंगे
अपने देश का सुंदर भविष्य बनाएँगे
चाय थडी ढाबे से जीवन मुक्त कर दो
थोड़ा सहारा बनो तन में खुशियाँ भर दो
बालश्रम ने काया को जालपाश में बांधा
अनैतिक काम कराते ये दुष्टों का धंधा
हम बच्चे पंछी बनकर उड़ान भरना चाहते है
खुदा ने जिंदगी दी है हँसकर जीना चाहते है
धन्यवाद |
किशन गोपाल मीणा शिक्षक केन्द्रीय
विद्यालय बूंदी
Thursday, 10 June 2021
सुरभि मीणा केंद्रीय विद्यालय बूंदी द्वारा स्वरचित कविता गाकर विश्व नेत्रदान दिवस पर जागरूकता प्रदान की |
हम सब दृष्टिदान करने का संकल्प लें। #WorldEyeDonationDay #विश्वनेत्रदानदिवस
जीवन की साँसे हैं कम,
पल पल में जी लो जीवन,
यह तन है तिनके से कमजोर
परहित में जीना है, तो कर दो नयनों का दान |
विश्व में चाहे, न किया हो किसी का अच्छा ,
आजीवन कहते रहे, तुम्हारा तुम देखो – मैं चला,
देह विदाई से पहले , किसी के लिए बनो वरदान
आंखो का तारा बनना है , तो कर दो नयनों का दान |
आपके नयनों से, वह देखेगा बड़े चाव से,
पथ पर आगे बढ़ेगा , खुद के अरमानों से,
उसकी अरदाश को, गले लगा लो विदाई से पहले ,
सदा जग में रहना , तो कर दो नयनों का दान |
लेखिका –सुरभि मीणा
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