Wednesday, 6 May 2020

हृदिस्थानस्थितो वायुर्यदा वक्त्रं प्रपद्यते। व्यायामं कुर्वतो जन्तोस्तद्बलार्धस्य लक्षणम्॥१०॥ शब्दार्थ • हृदिस्थानस्थितः - छाती में स्थित (रहनेवाला) • वायुः - हवा • यदा - जब • वक्त्रम् - मुखम्। • प्रपद्यते - प्राप्नोति। पहुंचता है • व्यायामम् - व्यायाम • कुर्वतः - करनेवाले • जन्तोः - जीवस्य। प्राणिनः। (मनुष्यस्य)। • तत् - वह • बलार्धस्य - आधी शक्ति का • लक्षणम् - निशान अन्वय यदा व्यायामं कुर्वतः जन्तोः हृदिस्थानस्थितः वायुः वक्त्रं प्रपद्यते, तत् बलार्धस्य लक्षणम् (भवति) जब व्यायाम करने वाले मनुष्य के फेफडों में रहने वाला वायु (सांस) मुंह तक पहुंच जाता है, (तो) वह आधे बल का निशान होता है। हमने पिछले श्लोक में पढा है कि व्यायाम कब तक किया जाना चाहिए। हमारा पूर्वोक्त श्लोक कहता है कि मनुष्य ने अपनी आधी शक्ति खत्म होने तक ही हररोज व्यायाम करना चाहिए। अन्यथा हमारी हानि हो सकती है। परन्तु व्यायाम करते समय हम कैसे समझ सकते हैं कि हमारी आधी शक्ति समाप्त हो चुकी है? इसका उत्तर यह श्लोक देता है। यह श्लोक कहता है कि हृदिस्थान में स्थित वायु यानी हमारे फेफडों में जो हवा होती है वह जब मुंह में आने लगती है, यानी सांस फूलने लगती है, तो हम समझ जाना चाहिए कि अब हमारी आधी शक्ति समाप्त हो चुकी है। अब हमें अपना व्यायाम रोक देना चाहिए।

हृदिस्थानस्थितो वायुर्यदा वक्त्रं प्रपद्यते।
व्यायामं कुर्वतो जन्तोस्तद्बलार्धस्य लक्षणम्॥१०॥

शब्दार्थ

·                     हृदिस्थानस्थितः - छाती में स्थित (रहनेवाला)
·                     वायुः - हवा
·                     यदा - जब
·                     वक्त्रम् - मुखम्। 
·                     प्रपद्यते - प्राप्नोति। पहुंचता है
·                     व्यायामम् - व्यायाम
·                     कुर्वतः - करनेवाले
·                     जन्तोः - जीवस्य। प्राणिनः। (मनुष्यस्य)। 
·                     तत् - वह
·                     बलार्धस्य - आधी शक्ति का
·                     लक्षणम् - निशान

अन्वय

यदा व्यायामं कुर्वतः जन्तोः हृदिस्थानस्थितः वायुः वक्त्रं प्रपद्यते, तत् बलार्धस्य लक्षणम् (भवति)

जब व्यायाम करने वाले मनुष्य के फेफडों में रहने वाला वायु (सांस) मुंह तक पहुंच जाता है, (तो) वह आधे बल का निशान होता है।


हमने पिछले श्लोक में पढा है कि व्यायाम कब तक किया जाना चाहिए। हमारा पूर्वोक्त श्लोक कहता है कि  मनुष्य ने अपनी आधी शक्ति खत्म होने तक ही हररोज व्यायाम करना चाहिए। अन्यथा हमारी हानि हो सकती है। परन्तु व्यायाम करते समय हम कैसे समझ सकते हैं कि हमारी आधी शक्ति समाप्त हो चुकी है?
इसका उत्तर यह श्लोक देता है। यह श्लोक कहता है कि हृदिस्थान में स्थित वायु यानी हमारे फेफडों में जो हवा होती है वह जब मुंह में आने लगती है, यानी सांस फूलने लगती है, तो हम समझ जाना चाहिए कि अब हमारी आधी शक्ति समाप्त हो चुकी है। अब हमें अपना व्यायाम रोक देना चाहिए।

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